कालिंजर कुंडार ,
महोबे पै फहराती जो ,
कीर्ति ध्वजा ,
खंगधारिओं ने फहराई है !
खजूरिया वो खजुराहो ,
कर रहा गुणगान ,
खेत सिंह हैं महान ,
युग नारी हरषाई है !
नंगी भोग्या जो ,
वस्तु बनी थी बाजार की ,
खेत सिंह राज्य ,
पूज्य ध्वजा बनी छाई है !
हुए जन बिह्वल ,
गायें सब करतल ,
हमें तो सत्ता श्रेष्ठ ,
खंगारों की ही आई है !
..........."अशोक सूर्यवेदी"
Wednesday, July 23, 2014
खेतसिंह हैं महान
Tuesday, July 22, 2014
जय खंगार
कर आचमन माँ वेत्रवती से ,
गणपति को शीश झुकता हूँ !!
फिर माँ सरस्वती मैं तेरे दर पर,
याचक बनकर आता हूँ !!
माँ से शब्द सम्पदा ले अब ,
इतिहासों के साक्ष्य जुटाता हूँ !!
फिर गिरिवासन तेरे दर पर,
श्रद्धा से शीश झुकता हूँ !!
कुलदेवी मात गजानन ",
साक्षी मैं यह तुमसे रखता आस !!
साथ कलम का देकर माँ अब ,
लिखवा दो तुम इतिहास !!
वीर की गाथा है यह जिसने ,
जूझ के जीना मरना सीखा !!
तो सच को सच गाने की खातिर ,
मैंने भी कब डरना सीखा !!
जो म्रत्यु भय से मुक्त कराती ,
मातु कालिके नमस्कार ! !
अब निर्भय होकर गाता हूँ ,
मैं गौरव गाथा जय खंगार !!
"अशोक सूर्यवेदी "
Monday, July 21, 2014
गिद्ध वासनी पुकारती है
काशी जैसी पुण्य भूमि ,
वीरों की ये वीर भूमि !
चोरों का है गढ़ हमें ,
ये न बतलाइए !
राष्ट्र हित धर्म हित ,
उठाया है खड्ग नित!
गाथा खंगारों की छुपी ,
पर्दा हटाइए !
भारती के पूतो ,
गिद्ध वासनी पुकारती है !
खेतसिंह जैसे सिंह ,
को न विसराइए !
बांदेलों का कहा सुना ,
सत्य से है परे सदा !
अंधी कानी दौड़ में न ,
कलम लजाइए .....!!
अशोक
वीरों की ये वीर भूमि !
चोरों का है गढ़ हमें ,
ये न बतलाइए !
राष्ट्र हित धर्म हित ,
उठाया है खड्ग नित!
गाथा खंगारों की छुपी ,
पर्दा हटाइए !
भारती के पूतो ,
गिद्ध वासनी पुकारती है !
खेतसिंह जैसे सिंह ,
को न विसराइए !
बांदेलों का कहा सुना ,
सत्य से है परे सदा !
अंधी कानी दौड़ में न ,
कलम लजाइए .....!!
अशोक
कुंडार को नमन है
शेरों सा है शेर वंश ,
वीरों में है वीर वंश !
महारुद्र अंश ,
खंगार को नमन है !
नारी की सुरक्षा हित ,
वीरों की परीक्षा हित !
चमकी जो सदा ,
असिधार को नमन है !
केशर ने जौहर किया ,
मानी स्वाभिमानी थी !
भस्मी भूति देह ,
अंगार को नमन है !
जूझना परम्परा है ,
जुझौति वसुंधरा है !
वीरों का है धाम ,
कुण्डार को नमन है !!
.........."अशोक सूर्यवेदी"
"गीत लिखूंगा तुम गाना "
फिर आई है शर्द लहर ,
अब सड़क किनारे बाहर गाँव ,
झड़ी में फिर बेर पकेंगे ,
लिए तुम्हारे मैं तोडूंगा ,
खट्टे मीठे तुम खाना ,
रक्त बिन्दुओं से ऊँगली पर ,
गीत लिखूंगा तुम गाना !
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना .........!!!
अब सड़क किनारे बाहर गाँव ,
झड़ी में फिर बेर पकेंगे ,
लिए तुम्हारे मैं तोडूंगा ,
खट्टे मीठे तुम खाना ,
रक्त बिन्दुओं से ऊँगली पर ,
गीत लिखूंगा तुम गाना !
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना .........!!!
Sunday, July 20, 2014
" उमर बीत गयी "
उमर बीत गयी कब जाने ,
शेष बचा जीवन कितना !
काम तनिक न हुआ जन्म का ,
लेकर आया था जितना !
आगाह तुम्हें करता हूँ ,
प्रिय तुम भूल न जाना !
निज अनुभव लेकर के ,
मैं गीत लिखूंगा तुम गाना !
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना ...!
शेष बचा जीवन कितना !
काम तनिक न हुआ जन्म का ,
लेकर आया था जितना !
आगाह तुम्हें करता हूँ ,
प्रिय तुम भूल न जाना !
निज अनुभव लेकर के ,
मैं गीत लिखूंगा तुम गाना !
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना ...!
Saturday, July 19, 2014
जाना , "तुम न जाना "
दूर है पनघट ,राह में पत्थर ,
जाना , तुम न जाना !
श्रम साध कुआँ खोदूँगा मैं ,
गैंती तसला मेहनत से ,
मैं गीत लिखूंगा तुम गाना ,
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना ....!!
जाना , तुम न जाना !
श्रम साध कुआँ खोदूँगा मैं ,
गैंती तसला मेहनत से ,
मैं गीत लिखूंगा तुम गाना ,
जाना , तुम न जाना , तुम न जाना ....!!
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