Tuesday, September 21, 2010

क्यों राघव क्यों ?

क्यों राघव क्यों ?
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गए छोड़ सौमित्र विकट वन में सीता की तन्द्रा जागी !
यह कैसा निर्णय लिया राम ने खुद से पूंछ रही वह राज्ञी !
राम ! तुम राजा जन जन के मन के अनुरागी !
मैं प्रिय प्रिया  तुम्हारी फिर भी किंचित रही अभागी !
ओ मानस मर्यादा के नव सोपान बनाने बाले राम !
क्या तुम्हारा नारी चिंतन भी यूँ ही रहा मिसाले   आम. 
अवध पति ! तुम न्यायमूर्ति थे न्यायिक पद पर विद्यमान !
यह आक्षेप सहा तुमने क्या अग्नि परीक्षा से अंजान ?
वादी ने कहा सुना तुमने निर्णय भी आप ही दे डाला ?
 मुलजिम को सुने बिना ही राजन वनवास निकाला  !
मुलजिम को ना सुनने  की प्रजापति कुछ लाचारी थी ?
या वादी की प्रतिक्रिया स्वामी विश्वासों पर भारी थी ?
 चित्रकूट की कुटिया में साथ तुम्हारे सुख ही पाया !
और विछुड़ कर तुमसे अशोक वाटिका स्वर्णपुरी में दुःख ही पाया !
तब मजबूरी में सहा वियोग तुम मेरी खातिर भटके वन में !
ओ निष्कासित करने वाले! खो दी क्या? जो थी प्रीत तुम्हारे मन में !
मैं धरती की बिटिया शायद वनवास भाग्य लिखा लाई!
यह क्लेश ना मुझको किंचित तुम साक्षी हो रघुराई !
राम  राज्य में रानी भी जब घोर उपेक्षा की भोगी .
यही कष्ट है मुझे अवध में नारी की क्या गति होगी .

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रचना :-
अशोक सूर्यवेदी  एडवोकेट 
मऊरानीपुर 
  

Sunday, September 19, 2010

मऊरानीपुर जल विहार महोत्सव २०१०

                    जल विहार महोत्सव २०१०
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जल विहार मऊरानीपुर की ऐतिहासिक परंपरा है ! भाद्रपद माह  की द्वादस  तिथी को भगवान अपने श्री मंदिर से  ना केवल सुखनई  के जल में विहार करने वरन भक्तों को दर्शन देने के लिए बाहर निकलते हैं ! ऐसा प्रसिद्द है कि जब भगवान मूर्ति स्वरुप में  एक बार मंदिर में प्रतिष्ठित हो जाते  है तो फिर बाहर नहीं निकलते हैं ! किन्तु लोक कल्याण के लिए अपने हर  खास और आम भक्त को दर्श-पर्श देने भगवान इस नगर में ना केवल अपने श्री मंदिर से बाहर निकलते हैं बल्कि सुखनई के जल में विहार कर भक्तों के दरवाजे दरवाजे जाकर उनकी कुशल क्षेम भी लेते हैं ! मऊरानीपुर में जल विहार का विशेष महत्व इसलिए भी है कि जब ब्रिटिश काल में इस परम्परा को रोकने की धर्म विरोधी कोशिश की  गयी तो नगर के प्रातः स्मरणीय  गूदर बादशाह जी भगवान की  अगवाई में अंग्रेजी आदेश की  अवहेलना कर परम्परा को जारी  रखा गया  इसलिए आज भी जलविहार के प्रथम दिन भगवान गूदर बादशाह जी महाराज का विमान शोभायात्रा की अगुवाई  करता है  !जल विहार के लिए भगवान गूदर बादशाह जी महाराज के अतिरिक्त भगवान  धनुषधारी जी महाराज , रामलला भगवान जानकी जी और लखन लाल जी सहित अनेकानेक विमानों में शोभायमान होकर पवित्र सुख नई के जल में विहार कर नगर भ्रमण कर वापिस अपने मंदिरों में आते हैं .