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Sunday, August 3, 2014

नील कंठ सा गढ़ कुंडार

सत्ता के उत्थान पतन में,
हक में आई जीत न हार !
नियति नटी ने निर्णायक बन ,
माथा झूठ को बारम्बार !
सागर "समय" के मंथन में तब ,
द्वेष भाव का विष निकला !
अपमानों का गरल गटक है ,
नीलकंठ सा गढ़ कुंडार !!
.............."अशोक सूर्यवेदी"