Saturday, July 28, 2012

बरगांय खंगार "कहानी एक गाँव की"

बरगांय खंगार 

"कहानी  एक गाँव की" 

 ईसवी सन 1533 के आसपास गुरसराय एक ठीकठाक रियासत थी जो की आजकल  झाँसी जनपद का एक छोटा सा कस्बा है उस समय कोई  दक्षिण ब्राहमण ऱाजा के पास  गुरसराय जागीर थी !   ऊसकी सेना मे खेबा घोसी  एक  सेना नायक था ! सेना में मुख्यतः अहीर  घोसी खंगार गूजर  परिहार आदि सैनिक थे ! खंगारों और परिहारों में  क्यों कर इतनी  निकटता है भगवान् जाने पर होती है सो इस घटना में भी यह निकटता थी ! 
                                                       परिहारों  की एक लड़की थी जमना.... खूबसूरत , अल्हड, भोली भाली,  जमना पर खेबा घोसी आसक्त हो गया , परिहारों  को ज्ञात हुआ तो वे आग बबूला हो गए लेकिन बहुत देर हो चुकी थी ! जमुना के गर्भ में खेबा घोसी की संतान पल रही  थी ! परिहारों की तलवार   म्यान से बाहर आ  गयी घोसी भी अपने सेना नायक के लिए मरने मारने को तत्पर  खंगार भी कहाँ चुप बैठते परिहारों का साथ  देने मैदान में उतर आये खंगारों को सन्मुख जान घोसिओं ने मुसलमानों को सहायता के लिए पुकारा ! 
                                                         मैदान में अपनी अपनी आन बान  के लिए लोहा बजा खून की नदियाँ बही रणचंडी का खप्पर रक्त से भर दिया गया    परिहार अपनी शान के लिए   युद्ध में  काम आये   बहुतेरे घोसी खेत रहे जो बचे वो खेबा घोसी के साथ मैदान को पीठ दिखाकर भाग गए ! युद्ध तो समाप्त   हुआ पर बड़ी  समस्या खंगारों के सामने  जमना के रूप में खड़ी  हो गयी ! इस लड़की का क्या हो जो परिहारों की है और जिसके गर्भ में खेबा घोसी की संतान है !
                                                                  निदान खंगार लड़की को लेकर राजा के पास जाते हैं ! समस्या गंभीर है राजा भी परेशान क्या किया जाये लड़की परिहारों की है उसके कुटुंब कबीले का कोई है नहीं खेबा घोसी जिससे वह गर्भवती है भाग गया है ! सोच विचार कर राजा ने खंगारों से कहा समस्या का हल तुम्हारे ही पास है खंगार ही इस लड़की को ग्रहण करें रियासत इसके बदले खंगारों को हथ्नापुर की जागीर देगी ! खंगार युवक इसके लिए तैयार नहीं थे जैसे तैसे खंगारों ने तेंदू खेडा के मान सिंह को तैयार कर लिया मान सिंह हथ्नापुर के जमीदार का भांजा था मान सिंह जमना के साथ हथ्नापुर में रहने लगा समय बीता जमुना ने खेबा के बेटे को जन्म दिया  और बाद में मानसिंह को भी एक बेटा जमना से हुआ !
हथ्नापुर में  नूर खां नाम का व्यक्ति का रहता था खंगारों से द्वेषवश वह खेबा घोसी से जा मिला नूर खां के उकसाने पर खेबा  हथ्नापुर आया , जमना से मिला , अपने बेटे को साथ लेकर चलने को कहा ! जमना नहीं मानी विपत्ति में छोड़ कर भागने वाले आशिक का साथ उसे गवारा नहीं था ! भगोड़े आशिक के लिए वह अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती थी ! खेबा गुस्से में आकर अपने बेटे को ढूंढता है न मिलने पर जमना को घर में बंद कर आग लगा देता है ! आग गाँव में फ़ैलगयी  सारा गाँव धू धू कर जल उठा ! बहुत धन और जन हानि हुई खेबा घोसी को गाँव वालो ने पकड़ कर मार डाला जमना और  उसके बेटे सभी द्वेष की आग में  जल मरे ! सारा गाँव जल गया .... लोक भाषा में "सारा गाँव बर गया" बरा हुआ यह गाँव पुनः आबाद हुआ और बरे हुए गाँव का नाम  बरगांय हो गया ...............

Sunday, March 18, 2012

madhya yug ke yoddha

" श्री गणेशाय नमः "

महोबा प्रसिद्द है पान के लिए , वीरों की आन वान शान के लिए , आल्हा उदल की पहिचान के लिए और भुजरियों के सम्मान के लिए  ! यही महोबा नगर जो आज उत्तर प्रदेश का एक जिला  है कभी भारत का एक गौरव शाली नगर था वाक्पति , विद्याधर , धंग , गंड , और यशोवर्मन जैसे पराक्रमी चंदेल नरेशों की राजधानी , जिनकी यश गाथा अफगान से गुजरात तक विस्तारित थी !
                                                                    ११ वीं शताब्दी अपने समापन को उद्दत थी और चंदेलों से  राजलक्ष्मी भी मुक्त होने को लालायित महोबा में  राजा परमाल महान चंदेल नरेशों की वंश परम्परा में सत्ता सुंदरी पर आशक्त शासन की बाग़ डोर सम्हाले हुए थे राज रंग में डूबे राजा शस्त्र  उठाने के काबिल तो न थे पर वीरों के सरताज जरुर थे , महाबली पराक्रमी योद्धाओं का उन्हें टोटा न था ! युद्ध उद्दत आल्हा उदल जैसे बनाफर सरदार  महोबा के गौरवशाली ध्वज के वाहक थे ! जिनके कारण चनेलों का यह प्रदेश उत्तर भारत की teen प्रमुख शक्तियों में स्थापित था किन्तु सत्ता सुंदरी तो मानो चंदेलों से ऊब चुकी थी !
                                                                         समुद्र शिखर से इच्छनी कुमारी को ब्याह  दिल्ली लौट रहे संभरीनाथ प्रथ्वी राज चौहान के  सुलतान मुहम्मद गौरी से युद्ध में घायल सैनिक मार्ग भटक कर महोबा आ पहुंचे और राजसी उद्यान में आ ठहरे ! राज ने सुना तो तुनक गया तिलमिला कर हरिदास बाघेला के साथ चुने हुए जाँगरा जादव  सोलंकी  गहरवार  गोहिल   और बनाफर यूथपों को चौहान सैनिकों को दण्डित करने का हुकुम दे रवाना किया  हरिदास बाघेला एक हजार वीरों का समूह ले उद्यान में चौहान सैनिकों को ललकारा ! गजनी के सुलतान को सहज ही बाँधने वाले चौहान के सैनिक युद्ध का आह्वान सुन कैसे चुप रहते दोनों और से तलवारें खिचीं रन चंडी का खप्पर चंदेल सैनिकों के रक्त  से भर दिया गया ........................

Tuesday, February 21, 2012

परमाल रासो

बुल्लाय  राज आल्हयं ! करंत मत्त ख्यालयं !!
बुलाय उद्द लीनयं ! कुमार दो प्रवीनयं !!
ब्रह्मा सु इंद्रजित्तयं ! सु बुद्ध चित्त नित्तयं !!
बुलाय प्रोहितं लियं ! लरन्न मत्त जंकियं !!
बुलाय कायथं कला ! सुचारि  बुद्धि है भला !!
बुलाय भट्ट लीनयं ! नरेस थाप कीनयं !!
बुलाय वैस वीरयं ! चंदेल चारु धीरयं !!
बुलाय साहि सुंदरं ! करंत बत्त अंदरं !!
गहैरवार रूपयं ! खंगार जंग जूपयं  !!
बुलाय राज इंदरं ! मल्हन्न नारि मंदरं !!
तहाँ सुमत्त कीनयं ! अनेक भ्रम्म लीन्यं !!

Sunday, February 12, 2012

परमाल रासो

परमाल रासो 

सह्सा मल सांखुल संग दियं ! इतनै सरदार सुवाम कियं  
कयमास कमद्धुज विक्रमयं ! तह टांक सुचाऊ अति क्रमयं !
जहं गौर संघातिय जोर दलं ! तहं खेत खंगार से चार बलं !
कयमास सु संमर मद्ध हुवं ! चतुरंगिय सैन विराज दुवं  !!
हलकारिय सैन नरे सुरयं ! चले चावंड राय बली धुरियं !
इहि भांति सुफौज पिलाय दियं ! कविचंद कहै वरदाईययं !!

Tuesday, February 7, 2012

परमाल रासो




                              सम्राट प्रथ्वीराज और उनके सामंत   

                                   
                                   सज्यो प्रथिराज सुसज्जिय सैन ! सजे सब सावंत सूर सतेन !!
                                    सजे चाहवान सुकन्ह समथ्थ ! सजे कछवाह पजून सुगथ्थ !!1
सजे सँग चालुक सारँग देव  ! सजे सु पँवार सुलख्खन येव !!
सजे सँग दाहिम चांवड़  सूर ! सजे कयमास महामुख नूर !!2
सजे कमधुज्ज सु निद्दुर राय ! सजे परसंग सु किज्जय चाय !!
सजे सँग भौंह चंदेल सुधीर ! सजे अचलेश सु भट्टिय वीर !!3
सजे पडिहार सु अल्ह कुमार ! सजे सहसामल साखुल भार !!
सजे सु बघेले लख्खन लाय ! सजे चहुवान सु संजम राय !!4
सजे अतताइय सूर सतन्न ! सजे सँग हाहुलीराय हतन्न !!
सजे सँग गंभिर हाड हवाल !सजे वरहद्द हमीर सुचाल !!5
सजे रयपाल निसान बजाय ! सजे सँग धीर सु धाँधुव राय !!
सजे जयपाल सु  जादव वीर ! सजे जय सिंघ सु संगर धीर !!6
सजे सँग चंद पुंडीर मरद्द ! सजे सँग गौरस हादिय हद्द !!
सजे हरिचंद मलेसिय कद्द ! सजे सँग नाहरराय मरद्द !!7
सजे वर सँग सु पल्हन देव ! सजे सँग मल्ल विशाल सुयेव !!
सजे सँग जादव जाम मरद्द ! सजे गहिलौत सु गोइंद  हद्द !!8
सजे सँग वीर मकुन्द पंवार ! सजे विझराज सुखेत खंगार !!
सजे सँग बादुल सा दुलमोय !सजे सँग मल्ल चंदेल संजोय !!9
सजे सँग भट्टिय भानु गहीर !सजे सँग राम राठौर सु वीर !!
सजे निरवान सुवीर मवाह ! सजे सँग सूर प्रसंग अथाह !!10
सजे पडिहार सु पीप मरद्द ! सजे भर भीम भवाल सुहद्द !!
सजे सँग मोरिय सादुल सूर ! सजे कनकेश लिए मुख नूर !!11
सजे सँग तारन मल्ल सहस्स ! बलीभद्र पूरन मल्ल रहस्स !!
सजे सँग धवार धीर परम्म ! सजे सँग रावत राम गरम्म !12
लिए सब सावंत सूर सधन्न ! किये जुध चाव उपाव मरन्न !!
कियै दर कूच चले चाहवान ! चंदेलन  उप्पर क्रोध निदान !! 13


प्रस्तुत  पंक्तिया हिंदी साहित्य के महान ग्रन्थ परमाल  रासो ( जिसे  कुछ विद्वान "प्रथ्वीराज रासो" का ही "महोबा समय" मानते हैं ) से ली गयी हैं प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने सम्राट प्रथ्वीराज चौहान  के साथ महोबा आक्रमण के लिए जो  जो वीर सामंत अपने अपने दल के साथ युद्ध के लिए प्रस्तुत हुए  उनका वर्णन किया है ............................"अशोक सूर्यवेदी"

मलखान 


कुरिय संग सब भूप जुत , तिहि बंधव सुलतान !
तिन सह संगर ऊभिया , धन्य भूप मलिखान !!
धन्य धन्य बछराज पितु , धन्य जननि जस खानि !
तिहि मलिखे सूत जाइया , जा जस विदित  जहान !!


प्रथ्वीराज के साथी  सभी वंशो के सभी वीर  जिन्होंने सुलतान शहाबुद्दीन गौरी को बांधा उनके साथ संग्राम करने वाला वीर मलखान धन्य है उसके पिता बच्छ राज और माता धन्य हैं जिन्होंने मलखान जैसा पुत्र जाया जिसका यश जहान में प्रसिद्द है ............................................."अशोक सूर्यवेदी"


इत आयव चहुवान  नृप , उत आयव मलखान !
लखा लखौ दुहुँ ओर हुव , बज्जे घोर निसान !!
चाहुवान मलखान जुरि , होत घोर घमसान !
बीर अलकपुर संभु सह , बुल्लिय  यही जुबान !!
चाहुवान चंदेल भर , भिरत भूमि भरिवथ्थ !
लेहु ईस बहु सीस थां , कह कह वीर सुकथ्थ !!